बंजारा बस्ती के बाशिंदे

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

यार ! गैस सिलेंडर यार !

›
यार ! गैस सिलेंडर यार ! ------------------------------- यार! गैस सिलेंडर यार ! काश ! तू इंसान होता जो देता है सबक़ बेशुमार। सबक़ पहली - ...
4 टिप्‍पणियां:

साक्षात् स्रष्टा

›
साक्षात स्रष्टा ----------------- एक शाम कारगिल चौक के पास कुम्हार के आवाँ के मानिंद पेट फुलाए संभवतः संभ्रांत गर्भवती एक औरत साक्षात ...
11 टिप्‍पणियां:

अनाम रिश्ते !

›
अनाम रिश्ते!/क्षणभंगुर ------ बाद लंबी तपिश के उपजी पहली बारिश से मिट्टी की सोंधी खुशबू की तरह उपजते हैं कुछ अनाम रिश्ते। सरदी की ठ...
2 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 30 मार्च 2019

मैं .. दो पंक्तियों में

›
तमाम उम्र मैं तो बस हैरान, परेशान, हलकान-सा तो कभी-कभी लहूलुहान बना रहा मानो कभी मुसलमानों के हाथों की गीता तो कभी हिन्दुओं के हाथों का ...
2 टिप्‍पणियां:

बंजारे हैं हम

›
बंजारे हैं हम वीराने में बस्ती तलाश लेते हैं नज़रों से आप दूर सही दिल के पास होते हैं   ©सुबोध सिन्हा
1 टिप्पणी:
‹
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Subodh Sinha
आम आदमी जो जीते जी तो तथाकथित समाज द्वारा तथाकथित हिन्दू , कायस्थ , सवर्ण और ना जाने क्या-क्या बनाया गया हूँ ... पर मर कर "देहदान" कर एक इंसान बन कर जाना चाहता हूँ ... ना शमशान , ना कब्रिस्तान ....
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.